Alone Shayari

💔 Alone Shayari

कभी-कभी इंसान भीड़ में रहकर भी अकेला महसूस करता है। ये शायरी उसी एहसास को शब्द देती है।


अकेले चलना सीख लिया मैंने,
अब किसी के साथ की जरूरत नहीं रही।


भीड़ में रहकर भी तन्हा हूं मैं,
अपनों के बीच भी अजनबी सा हूं मैं।


तन्हाई ने मुझे मजबूत बना दिया,
अब किसी की कमी महसूस नहीं होती।


खामोशी में जीना आ गया है,
अब दर्द भी आवाज नहीं करता।


जिसे अपना समझा वही दूर हो गया,
अब खुद से ही रिश्ता जोड़ लिया।


दिल टूटने की आवाज नहीं होती,
बस इंसान अंदर से खाली हो जाता है।


अब किसी से उम्मीद नहीं रखता,
क्योंकि उम्मीद ही दर्द देती है।


अकेलापन अब आदत बन गया है,
लोग आते हैं और चले जाते हैं।


किसी को फर्क नहीं पड़ता यहां,
कौन अंदर से कितना टूटा है।


अब मुस्कुराना सीख लिया है,
चाहे अंदर कितना भी दर्द हो।

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