Aapke hosle ko banaye rakhne ke liye kuch behatrin Hosla Shayari prastut ki jaa rhi hai.Thanks
Hosla Shayari
Mukammal jahan par
Humara bhi raj ho jayega
Hum udenge itni unchai par
Jahan se sara jamana
Nazar aayega
मुकम्मल जहाँ पर
हमारा भी राज हो जायेगा
हम उड़ेंगे इतनी ऊंचाई पर
जहाँ से सारा जमाना
नज़र आएगा
हमारा भी राज हो जायेगा
हम उड़ेंगे इतनी ऊंचाई पर
जहाँ से सारा जमाना
नज़र आएगा
Hoslo ko ki aane se
Pahle pareshaniyo
Ko so baar sochna pade
इतना बुलंद करलो अपने
होसलो को की आने से
पहले परेशानियो
को सौ बार सोचना पड़े
होसलो को की आने से
पहले परेशानियो
को सौ बार सोचना पड़े
Jisne waqt ko badalne ka
Hosla rakha hai
वक़्त उसी पर हँसा है
जिसने वक़्त को बदलने का
हौसला रखा है
जिसने वक़्त को बदलने का
हौसला रखा है
Ye sochkar ki main ud nhi paunga
Unhe kya pta tha ki issi jameen ki
Mitti ka istemaal karke main ek
Aalishan ghar banaunga
जिन्होंने उठाया नही मुझे जमीन से
ये सोचकर कि मैं उठ नही पाउँगा
उन्हें क्या पता था की इसी जमीन की
मिटटी का इस्तेमाल करके मैं एक
आलिशान घर बनाऊंगा
ये सोचकर कि मैं उठ नही पाउँगा
उन्हें क्या पता था की इसी जमीन की
मिटटी का इस्तेमाल करके मैं एक
आलिशान घर बनाऊंगा
Aisi to koi hasti hi nhi
Paani me tairne ka jo hoonar na
Rakhe aisi to koi kasti hi nhi
मिटा सके हमारी बस्ती को
ऐसी तो कोई हस्ती ही नहीं
पानी में तैरने का जो हुनर ना
रखे ऐसी तो कोई कश्ती ही नहीं
ऐसी तो कोई हस्ती ही नहीं
पानी में तैरने का जो हुनर ना
रखे ऐसी तो कोई कश्ती ही नहीं
Aati hai jab hosle ho insaan ke
Aasmaan se unche to jeet to usse
Meel hi jaati hai
आंधी अपने साथ में रेत को लेके
आती है जब होसले हो इंसान के
आसमान से ऊँचे तो जीत तो उसे
मिल ही जाती है
आती है जब होसले हो इंसान के
आसमान से ऊँचे तो जीत तो उसे
मिल ही जाती है
Vo duniya ko kya jaanega
Jiski aadat ho excuse dene ki
Vo mauko ko kya pahchanega
जो जान ना सका खुद को
वो दुनिया को क्या जानेगा
जिसकी आदत हो एक्सक्यूस देने की
वो मौको को क्या पहचानेंगे
वो दुनिया को क्या जानेगा
जिसकी आदत हो एक्सक्यूस देने की
वो मौको को क्या पहचानेंगे
Kyoki hum apne hoslo se udna jaante hai
Jo lagta hai duniya ko namumkin
Ussi kaam ko karne ki thante hai
पंखों की हमे जरूरत नहीं
क्योंकि हम अपने हौसलों से उड़ना जानते है
जो लगता है दुनिया को नामुमकिन
उसी काम को करने की ठानते है
क्योंकि हम अपने हौसलों से उड़ना जानते है
जो लगता है दुनिया को नामुमकिन
उसी काम को करने की ठानते है
Jeet se jyada ho
Ussi khel ko khelne ki
Meri aadat puraani hai
जिसमे हारने की संभावना
जीत से ज्यादा हो
उसी खेल को खेलने की
मेरी आदत पुरानी है
जीत से ज्यादा हो
उसी खेल को खेलने की
मेरी आदत पुरानी है











