Humare jine ka ek matra sadan hai Nature jahan se hume jeene ke liye har cheez milti hai.Nature ki khubsurti ke to kya kahne,poem on nature me nature ki visheshtayo par kuch mahatv-purn lines likhi gai hai.Thanks
🌼Poem On Nature🌼
"कुदरत की ये अद्भुत माया
कोई समझ ना पाया है
हर दिन बदले मौसम देखो
कहीं धूप कहीं झाया है"
कोई समझ ना पाया है
हर दिन बदले मौसम देखो
कहीं धूप कहीं झाया है"
🌻
पानी को ही भाप बनाकर
बादल भरकर लाया है
सुखी बस्ती वालों को
इसने खूब निलाया है
सुखी बस्ती वालों को
इसने खूब निलाया है
🌺
"कुदरत की ये अद्भुत माया
कोई समझ ना पाया है"
कोई समझ ना पाया है"
🍁
पेडो ने पेडो से मिलकर
हमको राग सुनाया है
आंधी के मौसम में इन
पेड़ो ने शोर मचाया है
हमको राग सुनाया है
आंधी के मौसम में इन
पेड़ो ने शोर मचाया है
🌸
कुदरत ने ही जन्म और मृत्यु
का ये खेल खिलाया है
इसे खेलने वाला खिलाड़ी
जीवित रह ना पाया है
का ये खेल खिलाया है
इसे खेलने वाला खिलाड़ी
जीवित रह ना पाया है
🌹
"हर दिन बदले मौसम देखो
कहीं धूप कहीं झाया है"
कहीं धूप कहीं झाया है"
🌷
इसने अपना सब कुछ देखो
इंसानों पर लुटाया है
इंसानो ने सब चीज़ों का
भरपूर लाभ उठाया है
इंसानों पर लुटाया है
इंसानो ने सब चीज़ों का
भरपूर लाभ उठाया है
🌴
फिर भी इसकी शक्ति को कोई
ख़त्म नहीं कर पाया है
क्योंकि प्रभु ने अपने हाथों
से है इसे सजाया है
ख़त्म नहीं कर पाया है
क्योंकि प्रभु ने अपने हाथों
से है इसे सजाया है
🌳
"कुदरत की ये अद्भुत माया
कोई समझ ना पाया है"
कोई समझ ना पाया है"
🍂
समय-समय पर इसने अपना
हमको क्रोध दिखाया है
जिसे देखकर सब लोगो ने
अपना शीश झुकाया है
हमको क्रोध दिखाया है
जिसे देखकर सब लोगो ने
अपना शीश झुकाया है
🌲
प्यार-मोहब्बत बाँटने इसने
इंसानों को बनाया है
लेकिन अपने ने अपने को
खूब है यहाँ रुलाया है
इंसानों को बनाया है
लेकिन अपने ने अपने को
खूब है यहाँ रुलाया है
🌱
"कुदरत की ये अद्भुत माया
कोई समझ ना पाया है
हर दिन बदले मौसम देखो
कहीं धूप कहीं झाया है"
🍃🍃🍃



