Patni se badkar koi jivan sathi nhi hota hai,dost bhi ek limit tak madad karte hai lekin patni.....patni har pal har ghadi madad karti hai,kitna bhi bura samay kyo na ho humesha saath rahti hai.Pyari patni ke liye (shayari for wife) kuch acchi shayari laye hai.
👌Shayari For Wife👌
Dilo me kai dukho ko dabaye rahti hai
Julm aur sitam vo har roj sahti hai
Kaise bhi halat aur kaisa bhi waqt ho
Ye patni ganga ki tarah bina ruke bahti hai
दिलो में कई दुखों को दबाए रहती है
जुल्म और सितम वो हर रोज सहती है
कैसे भी हालात और कैसा भी वक़्त हो
ये पत्नी गंगा की तरह बिना रुके बहती है
जुल्म और सितम वो हर रोज सहती है
कैसे भी हालात और कैसा भी वक़्त हो
ये पत्नी गंगा की तरह बिना रुके बहती है
Ladki samajh kar poke kiya karta tha
Vo nikali meri bibi jiske sath main
Roj gande joke kiya karta tha
फेसबुक पर जिसको कोई और
लड़की समझ कर पोक किया करता था
वो निकली मेरी बीबी जिसके साथ मैं
रोज गंदे जोक किया करता था
लड़की समझ कर पोक किया करता था
वो निकली मेरी बीबी जिसके साथ मैं
रोज गंदे जोक किया करता था
To vo bhi sah leti hai
Patni apne jivan me
Bahut pariksha deti hai
पति अगर जुल्म करे
तो वो भी सह लेती है
पत्नी अपने जीवन में
बहुत परीक्षा देती है
तो वो भी सह लेती है
पत्नी अपने जीवन में
बहुत परीक्षा देती है
Pareshaniyon ko mere pass
Patni ki wajah se aaj bhi
Hai zindagi meri jhakkash
वो आने नहीं देती
परेशानियों को मेरे पास
पत्नी की वजह से आज भी
है ज़िन्दगी मेरी झक्कास
परेशानियों को मेरे पास
पत्नी की वजह से आज भी
है ज़िन्दगी मेरी झक्कास
Bina aurat ke akela ye aadmi hai
जलती है मोम तो पिघलना भी लाज़मी है
बिना औरत के अकेला ये आदमी है
बिना औरत के अकेला ये आदमी है
Jaam bna kar pi gai
Meri patni mere naam se
Jivan bhar ji gai
मुसीबत में मेरे आंसुओं को
जाम बना कर पी गई
मेरी पत्नी मेरे नाम से
जीवन भर जी गई
जाम बना कर पी गई
मेरी पत्नी मेरे नाम से
जीवन भर जी गई
Jaan bhi de sakti hai
Patni ki izzat karo
Kyoki vo swam hi ek shakti hai
पति की खातिर जो अपनी
जान भी दे सकती है
पत्नी की इज़्ज़त करो
क्योंकि वो स्वयं ही एक शक्ति है
जान भी दे सकती है
पत्नी की इज़्ज़त करो
क्योंकि वो स्वयं ही एक शक्ति है
Uske rahn-sahn me kabhi numahish hoti hai
Jab dekhti hai auro ko vo sajte aur sanwarte
To usse bhi alag dikhne ki khwahish hoti hai
पत्नी के दिल में भी कुछ ख्वाहिश होती है
उसके रहन-सहन में कभी नुमाहिश होती है
जब देखती है औरों को वो सजते और संवरते
उसके रहन-सहन में कभी नुमाहिश होती है
जब देखती है औरों को वो सजते और संवरते
तो उसे भी अलग दिखने की ख्वाहिश होती है
Sapno ko dba deti hai
Armaan to uske bhi bahut hai
Par vo dil me chhupa leti hai
पति की खातिर वो अपत्नी अपने
सपनो को दबा देती है
अरमान तो उसके भी बहुत है
पर वो दिल में छुपा लेती है
सपनो को दबा देती है
अरमान तो उसके भी बहुत है
पर वो दिल में छुपा लेती है











