BIHARI KE DOHE IN HINDI

बिहारी के 10 प्रसिद्ध दोहे (अर्थ सहित)

Bihari ke dohe

नहिं पराग, नहिं मधुर मधु, नहिं विकास यह काल।
अली कली ही सों बंध्यो, आगे कौन हवाल॥
👉 जब फूल खिला ही नहीं...

बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय।
सौंह करै, भौंहन हँसे, देन कहै नटि जाय॥
👉 कृष्ण राधा से बात करने के लिए मुरली छिपाते हैं।

सतसैया के दोहरे, ज्यों नावक के तीर।
देखन में छोटे लगें, घाव करें गंभीर॥
👉 छोटे लेकिन गहरे असर वाले।

कहत, नटत, रीझत, खिझत, मिलत, खिलत, लजियात।
भरे भौंन में करत हैं, नैनन ही सब बात॥
👉 आंखों से ही सब बात होती है।

दुग उरझत, टूटत कुटुम, जुरत चतुर चित प्रीति।
परत गांठि दुरजन हिये, दई नई यह रीति॥
👉 प्रेम जोड़ता है, बुराई तोड़ती है।

जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ।
मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ॥
👉 मेहनत करने वाला ही पाता है।

नयनन ही सों पीर ज्यों, ज्यों नयनन ही सों चैन।
ज्यों-ज्यों देखत श्याम को, त्यों-त्यों बढ़तैं नैन॥
👉 प्रेम में दर्द और सुकून दोनों हैं।

अंग-अंग नग जगमगत, दीपशिखा सी देह।
दिया बढ़ाए हू रहै, बढ़त उजास सनेह॥
👉 सौंदर्य दीपक जैसा चमकता है।

बड़े न हूजै गुनन बिनु, बिरछ न फूलै आम।
गुनहीन नर जगत में, पावत नाहीं नाम॥
👉 बिना गुण सम्मान नहीं।

छीके धूरि न पाय करि, गह्यो न छूट्यो जाय।
ज्यों-ज्यों करै उपाय मन, त्यों-त्यों उलझत जाय॥
👉 समस्या ज्यादा उलझती जाती है।

🎉 Conclusion

बिहारी के दोहे छोटे होते हैं लेकिन जीवन की गहरी सीख देते हैं।

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