Surdas Ke Dohe (सूरदास के दोहे)

🌼 Surdas Ke Dohe (सूरदास के दोहे)

सूरदास जी भक्ति काल के महान कवि थे, जिन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में अनेक सुंदर दोहे और पद लिखे। उनके दोहे प्रेम, भक्ति और जीवन की सच्चाई को दर्शाते हैं।


मैया! मोहे दाऊ बहुत खिझायो।
मोसों कहत मोल को लीनो, तू जसुमति कब जायो॥

👉 अर्थ: बाल कृष्ण अपनी माता से शिकायत करते हैं कि उनके भाई बलराम उन्हें चिढ़ाते हैं।

अखियाँ हरि दर्शन की प्यासी।
देख्यो चाहत कमल नयन को, निसदिन रहत उदासी॥

👉 अर्थ: भक्त भगवान के दर्शन के लिए हमेशा तड़पता रहता है।

प्रभु मेरे अवगुण चित न धरो।
समदरसी है नाम तिहारो, चाहो तो पार करो॥

👉 अर्थ: भगवान से प्रार्थना कि वे दोषों को नजरअंदाज कर मुक्ति दें।

जाकी रही भावना जैसी।
प्रभु मूरत देखी तिन तैसी॥

👉 अर्थ: इंसान की भावना के अनुसार ही भगवान का अनुभव होता है।

सुनहु सखा! कहत मैं अनुभव अपना।
सत हरि भजन जगत सब सपना॥

👉 अर्थ: भगवान का भजन ही सत्य है, बाकी सब सपना है।

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📌 Conclusion

सूरदास के दोहे हमें भक्ति, प्रेम और जीवन की सच्चाई सिखाते हैं। उनके शब्द आज भी लोगों को भगवान के करीब लाने का कार्य करते हैं।

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