Beti Par Kavita | बेटी पर कविता............!

बेटी पर कविता,Beti Par Kavita के माद्धयम से एक लड़का अपनी माँ से पूछता है की माँ ,इस बेटी को ये दुनिया क्यूँ सताती है,क्यूँ इसको जीने नही देते लोग ,क्यूँ इसको गलत नज़रों से देखते है,माँ मुझे बता कि क्यों ऐसा होता है,कुछ इन् निम्न पंक्तियों के द्वारा वो अपनी माँ से ये सब पूछता है.

     Beti Par Kavita

                                      
Beti Par Kavita | बेटी पर कविता........



माँ जो जग को रोशन करती
क्यूं हम उसको भुझाते है
बेटी के अस्तित्व को क्यूँ हम
इस दुनिया से छुपाते है.

हर घर में खुशियां वो लाती
मात-पिता का मान बढ़ाती
फिर भी जीवन में वो इतनी
टोकर क्यूँ है खाती है.

माँ जो जग को रोशन करती,
क्यूँ दुनिया उसको सताती है.

जिसके बिना संसार की कोई
कल्पना नही कर सकता
अदृश्य भगवान भी जिसकी
खाली जगाह नहीं भर सकता.

उस प्यारी ,परियों जैसी
बेटी को हम क्यूँ रुलाते है
माँ जो जग को रोशन करती
क्यूं हम उसको भुझाते है

जो रूठे हुए इंसान को भी माँ
पल भर में है मना लेती
जो टूटे हुए मकान को भी माँ
घर और स्वर्ग बना देती

जिसके पावन चरणों को
हम हर तीज-त्यौहार पर छुते है
जिस घर में इसका जन्म ना हो
वो घर भी सूने होते है

फिर क्यूं इस दुलारी बेटी को
ऐ लोग नही जीने देते
जो देती है सबको अमृत
उसे क्यूँ पानी नहीं पीने देते

माँ इसके दर्दो को देखके मेरा
दिल भी अब भर-आया है
सबके ऊपर होना चाहिए
कुछ ऐसा इसका साया है

माँ जो जग को रोशन करती
मैंने तुझमे उसको पाया है
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