Poem On Father....पिता पर कविता....

पिता परिवार का एक बहुत अहम हिस्सा होता है,जो की हम पहले से जानते ही है,वैसे तो पिता के व्यक्तित्व के बारे में चंद लाइनो में नहीं कहा जा सकता फिर भी हम पिता के व्यक्तित्व से आपको रूबरू कराने के लिए एक छोटी सी पिता पर कविता Poem On Father लाये है.धन्यबाद
                                                   
Poem On Father....पिता पर कविता....


 Poem On Father....

              पिता                                              
पिता यार है,प्रेरणा है,प्यार की मिसाल है,
पिता के शरीर में जो दिल है, वो बहुत ही विशाल है.

         पिता
  पिता पर्वत है,बरगद है,परिवार का सहारा है,
पिता अपनी जिम्मेदारियों से कभी नहीं हारा है.

         पिता

पिता प्रभास है,उल्लास है,संसार के दुखों का नाश है,
पिता के होने से ही सूरज का प्रकाश है.

         पिता

पिता वक़्त है,शक्त है,जीवन की अभिव्यक्ति है,
पिता के चरणो में संसार की सारी शक्ति है.

         पिता

पिता दानी है, प्राणी है,विश्व की अभिलाषा है,
पिता के नाम के बाद भगवान् का नाम आता है.

         पिता

पिता चंचल है,सम्बल है,समस्त भाषाओं का ज्ञान है,
पिता की नज़रों में सारे बच्चे एक समान है.

 पिता के जैसा दुनिया में कोई हो नही सकता |
और पिता के कर्मो को कभी कोई धौ नही सकता ||


          पिता

पिता की आँखों में समाये काफी सपने है,
पिता के होने से बाजार के सारे खिलौने अपने है.

          पिता

पिता रक्षक है,रखवाला है,ब्रम्हांड का रचियता है,
पिता अपने बच्चो के आगे ही पसीजता है.

          पिता

पिता भावुक है.नाजुक है,प्रेम का अनुशासन है,
पिता के बताए चलते घर में प्रशासन है.

          पिता

पिता चूड़ी है,सिन्दूर है,माँ का सुहाग है,
पिता खिले हुए सुंदर फूलो का बाग है.

          पिता

पिता सृष्टि है,दृष्टि है,पंच तत्वों का मेल है,
पिता चढ़ती हुई दीवारों पर पेड़ो की कोई बेल है.


पिता के व्यक्तित्व का कोई विकल्प नहीं होता |
पिता पूरा ना कर सके ऐसा कोई संकल्प नहीं होता ||

 खुशनसीब है वो जिनके माँ-बाप होते है
क्योंकि माँ-बाप के हाथ दुनिया के
🙏सबसे प्यारे हाथ होते है🙏



 Thanks for reading.....Poem On Father
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