Love Shayari

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Jan 25, 2019

Motivational Stories.....प्रेरक कहानियाँ....Morale

यह कहानी उस समय की है जब भारत में फैक्ट्रियां बड़ी तेजी से लगी जा रही थी और बड़ी तादात में लोग बिज़नेस की तरफ आकर्षित हो रहे थे.यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति के बारे में है जिसने अपनी ज़िन्दगी के लगभग तीस वर्ष संघर्ष करने में निकाल दिए इन वर्षो में उसको इतनी असफलताए मिली जो अगर एक सामान्य व्यक्ति को मिले तो वो टूट जायेगा लेकिन उसने हार नहीं मानी और आगे बड़ा फिर जो उसने पाया वो किसी चमत्कार से कम नही साथ ही उसने लाखो करोड़ो लोगो की ज़िन्दगी भी बदली. इस व्यक्ति ने दिखाया की अगर आपके अंदर आगे बढ़ने की चाह है तो दुनिया की कोई ताकत आपको आगे बढ़ने से रोक नहीं पायेगी. ये मोटिवेशनल स्टोरी(Motivational Stories) ख़ास आपके लिए है इसको पड़े और कुछ सिखने की कोशिश करें | Thanks

Motivational Stories.....प्रेरक कहानियाँ

Motivational Stories

 जन्म स्थान  
इस व्यक्ति का नाम है हरिया जिसका जन्म मध्यप्रदेश के एक छोटे से गॉव(ग्वालियर) में ०६-०६-१९५६ को एक गरीब परिवार में हुआ | उसकी माँ का नाम प्रतिभा और पिता का नाम हरिलाल था उसकी दो बहने और एक भाई था सबसे बड़ी बहन रिहिनी,फिर उससे छोटा एक भाई जिसका नाम विजया था,सबसे छोटी बहन का नाम हया था और हरिया घर में सबसे छोटा था. हरिया के पिता एक छोटी सी फैक्ट्री में गार्ड का काम करते थे जिससे उनका गजरा तो चल जाता था.पर वो अपने बच्चो को अच्छी शिक्षा दे ने में असमर्थ थे.काम आमदनी और थोड़ी बहुत सुख सुविधाओं से भी उनका गुजारा आराम से चल रहा था  और वो सब भी अपनी ज़िन्दगी से खुश थे.लेकिन खुशियां ज्यादा दिन नहीं रहने वाली थी उनके ऊपर प्रोब्लेम्स का पहाड़ टूटने वाला था 

 पारिवारिक समस्याएं

वो टुटा संन १९७१ में ६ जून को इस समय जब सब हरिया का जन्म दिन मना रहे थे तभी तेज आंधी शुरू हो गई और साथ में बारिश भी होने लगी | रात का समय था बारिश के लगातार होने के कारन हरिया के घर की झत में से पानी अंदर आने लगा तो उसका बड़ा भाई विजया उसको सही करने लग गया लेकिन पानी फिर भीअन्दर आने लगा तो उसने उसके ऊपर एक लोहे की तीन टीन डालने का सोचा और पास ही एक पडोसी से टीन मांगने जा रहा था |

 रात का समय था लाइट नहीं थी  तभी अचानक से पेड़ की एक डाल टूट कर उसके सिर पर गिर गई फ़ौरन उसको अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन चोट गहरी होने के कारन विजय की मौत हो गई जो किसी बड़ी मुसीबत से काम नहीं थी.क्योकि विजय की मौत उसकी जवानी में हुई थी अब सब लोग हरिया को अपशगुनी समझने लगे और पहले की तरह बर्ताव भी नहीं करते थे.हरिया पंद्रह वर्ष का हो गया था तो उसके पिता हरिलाल ने उसको चाय वाले की दूकान पर लगा दिया और ज़िन्दगी काटने लगी |

लेकिन परेशानी अभी ख़त्म होने वाली नहीं थी,हरिलाल को चौरी के आरोप में गार्ड की नौकरी से हाथ धोना पड़ा और पुलिस भी पकड़ कर ले गई. तो हरिया अपने पिता को छुड़ाने के लिए पुलिस से लड़ गया ,तो उसको पुलिस वालो ने बहुत मारा और उसको भी जेल में डाल दिया गया लेकिन उसकी माँ ने कुछ पैसो का इंतज़ाम करके अपने पति और बेटे को छुड़वा लिया | वो जेल से तो बाहर आ गए पर अब उनका जीना और भी मुश्किल हो गया क्योकि कोई भी व्यक्ति हरिलाल को काम देना नहीं चाहता था,अब वो अन्न के एक-एक दाने के लिए तरसने लगे और गॉव वालो ने उनको गाव् से  बाहर निकल दिया. उन सब लोगो ने मंदिर में सौके अपनी रात गुजारी,जब सुबह उठे तो देखा की हरिया की बड़ी बहन रोहिणी वह पर नहीं थी बस एक पत्र था

जिसमे लिखा था "पिताजी में एक लड़के से प्यार करती हूँ जिसका नाम हीनेश है मैं उसके साथ जा रही हूँ वैसे भी मैं आप पर बोझ बन रही थी माँ, भाई ,बहन का ख्याल रखना"
आपकी रोहिणी 

इस को सुन कर हरिलाल पूरी तरह से टूट गया और उनकी हैरत अटैक आने से मौत हो गई एक साल में दो लोगो की मौत से परिवार पूरी तरह से बिखर गया और छोटे भाई-बहनो के ऊपर से पिता का साया भी छीन गया  अब उनके परिवार में सिर्फ तीन लोग थे हरिया,हया और उनकी माँ | कहते है ना जब मुसीबत आती है तो कोई साथ नहीं देता सिवाय ऊपर वाले के उनके किसी भी रिश्तेदार ने उनका साथ नहीं दिया वो सब पूरी तरह से अकेले थे तभी एक महिला जिसका नाम सरिता देवी था उसको उन पर दया आ गई और उसने उनको एक कमरा रहने के लिए दे दिया | 

हरिया की माँ प्रतिभा सरिता देवी के यहाँ साफ़-सफाई और बर्तन धोने का काम करने लगी जिससे उसको कुछ आमदनी हो जाती थी और हरिया चाय वाले की दूकान पर काम करने लगा , हया घर पर ही रहती थी ऐसे ही उनका जीवन व्यतीत होने लगा और प्रतिभा अब बहुत बीमार भी रहने लगी. हरिया अब और ज्यादा म्हणत करने लगा वो रात में होटल में बर्तन धोने भी जाया करता था.क्योकि अब उसकी माँ के इलाज़ के लिए पैसो की जरूरत थी और प्रतिभा अब काम भी नहीं कर सकती थी | 

 माँ की बिमारी
 
हरिया अपनी माँ को अब और इस हालात में नहीं देखना चाहता था क्योकि उसकी बिमारी टिक ही नहीं हो रही थी इसलिए वो अपनी माँ का इलाज़ कराने के लिए उनको दिल्ली लाया जिसके लिए उसने अपने साहब से कुछ रुपया उदार मांगे. डॉक्टर ने माँ को देखा और फ़ौरन ऑपरेशन के लिए बोलै क्योकि माँ के लिवर में प्रॉब्लम थी और अगर फ़ौरन ऑपरेशन नहीं कराया तो उनकी मौत भी हो सकती थी,लेकिन ऑपरेशन के लिए ५०,०००/- रुपयों की जरूरत थी जो उसके लिए जुटाना नामुमकिन था लेकिन लाने तो थे क्योकि माँ को बचाना था तो वो पैसो की व्यवश्ता के लिए साहूकार के पास पहुँचा लेकिन कोई भी व्यक्ति उसको पैसे देने के लिए राजी नहीं था | 

तो वो बहुत परेशांन हो गया और उसने पैसे चुराने के बारे में सोचा लेकिन वो पैसे कहाँ से चुराता फिर,उसको याद आया की सरिता देवी तो पैसे वाली है तो उसने उसी के यहाँ से पैसे चुराने का प्लान बनाया | प्लान के मुताबिक वो रात में उनके घर में घुसकर पैसे चुराकर भाग ही रहा था की सरिता देवी के छोटे लड़के लल्लन ने उसको देख लिया लेकिन वो उसको जख्मी कर के वहां से भाग गया और दिल्ली पहुँच के अस्पताल में ऑपरेशन के लिए पैसे जमा कर दिए उसकी माँ की जान तो बच गई लेकिन पुलिस उसको पकड़ कर ले गई और उसको छह साल की सजा सुनाई गई |  

 परिवार का मिलना
 
हरिया की माँ और उसकी बहन हया ने ग्वालियर छोड़ दिया और वो लोग दिल्ली चले गए वहां पर जीवन यापन करके अपना जीवन काटने लगे और अब तो हया भी शादी लायक हो गई थी लेकिन उससे शादी करता कोन क्योकि उनके पास देने के लिए कुछ नहीं था. संन १९७५ में प्रतिभा और हया दोनों मंदिर के पास बैठे थे,तभी वहां उन्होंने देखा की एक तीन-चार साल की लड़की सीढ़ियों की तरफ आ रही थी उसकी माँ ने उसको आवाज लगाई पर उसने सुना नहीं और सीढ़ियां चिकनी भी थी तो उसको लगा कहीं वह गिर नहीं जाये तभी हया भागकर गई और उस लड़की को बचा लिया | 
उसकी माँ आई तो वो उन दोनों को देखकर अचम्भे में पड गई क्योकि वो उसकी माँ प्रतिभा और बहन हया थी, फिर उन दोने ने उसको सभी हाल कहाँ और रोने लगी फिर रोहिणी उन दोनों को अपने साथ अपने घर ले गई. वहां पर उसने उनको अपने सास-ससुर से मिल वाया फिर वो वहीँ रहने लगे.लेकिन उसकी सास उसको ताने मारा करती थी जिससे तंग आकर वो दोनों वहां से चले गए लेकिन रोहिणी के देवर के इरादे सही नहीं थे वो हया को गन्दी नज़रो से देखता था | हया और उसकी माँ दोनों चौका-बासन का काम करने लगे | 

 बहन की शादी

एक दिन की बात है जब रोहिणी की लड़की का जन्म दिन था उसी दिन रोहिणी के देवर हेमू ने हया और प्रतिभा को लाने के लिए आग्रह किया और वो उन दोनों को लेने चला गया घर पहुँच कर उसने देखा की हया घर पर अकेली थी और उसकी माँ अभी काम पर से वापस नहीं आई तो हेमू ने हया से कहा की चलो में तुम्हे छोड़ आऊँ माँ को बाद में ले जाऊंगा,हया ने मना किया लेकिन हेमू जिद करने लगा,हया उसके इरादे समझ नहीं पा रही थी और वो दोनों चले गए लेकिन हेमू उसको सुनसान रास्ते पर यह बोल कर ले गया की यह शॉर्टकट है और फिर उसने गाडी रक् दी तो हया ने पूछा की आपने गाडी क्यों रोक दी तो उसने बोलै की उसे टॉयलेट करना है पर वह उसके साथ छेड़-छड़ करने लगा और हया चिल्लाई लेकिन वहां पर सुनने वाला कोई नहीं था फिर हेमू ने अपनी गन्दी हरकते और बड़ाई और हया का बलात्कार कर दिया  


वो बहुत रोइ ,चिल्लाई लेकिन कोई भी व्यक्ति उसकी चीखो को नहीं सुन सका | फिर वो उसको घर पर ले गया और किसी को नहीं बोलने की धमकी दी,बाद में वो प्रतिभा को भी लेने आया और सब लोगो ने बच्ची का जन्म दिन मनाया | दो-तीन दिन बाद हया ने यह सब अपनी माँ को बता दिया तो माँ उसको ले कर रोहिणी के घर गई और हेमू के खिलाफ केस करने को कहाँ या फिर वह उसके साथ शादी करे हेमू शादी के लिए तैयार हो गया और दोनों की शादी हो गई |

 माँ का मिलना और शादी  

अब प्रतिभा अकेली हो गई,हरिया की सजा पूरी हो गई थी और वो जेल से छूट गया था लेकिन वि जब सरिता देवी के घर गया तो उसको माँ-बहन कोई नहीं दिखा तो उसने सरिता देवी से पूछा तो उसने बताया की वो लोग दिल्ली चले गए है,और हरिया ने उनसे माफ़ी मांगी और कहाँ की वो उनके पैसे अवश्य लौटाएगा फिर वहां से वो दिल्ली के लिए रबाना हो गया,उसने उनको बहुत ढूंड़ालेकिन वो कहीं नहीं मिले.हरिया इक्कीश साल का हो गया था और अब उसको कैसे भी करके पैसे कमाने थे लेकिन उसको समझ नहीं आ रहा था की वह क्या करे उसने बहुत साड़ी फैक्टरियों में काम करने के लिए आवेदन किया लेकिन उसको कहीं काम नहीं मिला.तभी उसको एक कबाड़े वाले की दूकान पर महीने का दो सो रुपया में काम मिल गया और उसकी ज़िन्दगी बढ़िया चलने लगी पर उसको हमेशा अपनी माँ और बहन की याद आती उसके पास तो माँ का फोटो तक नहीं था | 

तभी सितम्बर १९७९ में जब वह रिक्शा में बैठकर अपने काम पर जा रहा था उसी समय उसको एक औरत दिखी उसको लगा की शायद ये उसकी माँ है उसने रिक्शा रुकवा दिया और उस औरत के पास पहुँचा तो वो सच में उसकी माँ ही थी उसने उनके चरण स्पर्श किये और आशीर्वाद लिया और वो उसी समय अपनी माँ को अपने घर ले गया और फिर माँ ने दोनों बहनो के बारे में बताया,वो अपनी बहनो से मिलने गया और उनके लिए कुछ लेके गया | उसकी बहने उसको देखकर बहुत खुश हुई साथ में उसकी माँ भी बहुत खुश थी की उनका बेटा मिल गया |


माँ चाहती थी की हरिया अब शादी लायक हो गया है और उसकी शादी कर देना चाहिए. संन १९८० में ४ नबम्बर को हरिया का विवाह मोतीदास की पुत्री ज्योति से हुआ जो की बहुत सुन्दर और खुशमिज़ाज़ औरत थी,उनका वैवाहिक जीवन अच्छा चल रहा था और ज्योति माँ का भी ख्याल रखती थी लेकिन १९८१ में अक्टूबर के महीने में हरिया की नौकरी चली गई क्योकि कबाड़े की दूकान बंद हो गई थी और वह फिर से बेरोजगार हो गया, अगले महीने नबम्बर में हरिया की पत्नी ज्योति ने बच्चे को जन्म दिया जो की अगले ही दिन मर गया ज्योति बहुत रोइ हरिया ने उसको संभाला |

 व्यवसाय और तरक्की

१९८२ में हरिया ने छोटा सा होटल खोला लेकिन वो कुछ ही समय बाद बंद हो गया,१९८३ में ज्योति ने एक लड़की को जन्म दिया जिसका नाम प्रियंका रखा और अगले ही महीने हरिया ने चाय की दूकान खोली जो समय के साथ चलने लगी लेकिन परेशानी ने हरिया का साथ नहीं छौड़ा और १९८४ में उसकी दूकान के ऊपर पेड़ गिर गया जिससे हरिया भी जख्मी हो गया लेकिन उसने हार नहीं मानी और दो महीने बाद फिर से चाय की दुकान खोली इसमें उसकी माँ और पत्नी ने भी साथ दिया |

इसी बीच उसकी बच्ची का जन्म दिन आ गया उसने बड़ी धूम-धाम से मनाया जिसमे उसने अपने ससुराल वालो को और अपनी दीदियो को बुलाया. १९८६ में हरिया की दूकान में गाड़ी घुस गई जिससे उसकी दूकान के साथ उसकी पैर की हड्डी भी टूट गई .१९८७ में हरिया को बिजली विभाग में काम मिल गया गार्ड का और साफ़-सफाई का जिससे उसने पैसे जोड़कर एक बड़ी दूकान खोली और वो चलने लगी जिससे उसने खूब पैसे कमाए |  

दिसम्बर १९८९ में ज्योति ने एक लड़के को जन्म दिया जिसका नाम रखा राहुल. हरिया अब तो सरिता देवी के पैसे भी वापस कर चूका था | हरिया इतने से संतुष्ट नहीं था वो और आगे बढ़ना चाहता था और उसने इसके लिए खूब मेहनत भी की | १९९१ में हरिया ने टोस्ट बनाने की एक फैक्ट्री खोली जो नहीं चली और उसको काफी नुकसान हुआ लेकिन हरिया ने हार नहीं मानी क्योकि उसको पता था की वो एक दिन सफल जरूर होगा | १९९२ में उसने प्लास्टिक बनाने की फैक्ट्री खोली जो चल पड़ी और उसने काफी सारे लोगो को काम दिया.१९९४ में उसने कपडे की दो मिल दो अलग-अलग जगह पर खोली,अब वो तेजी से आगे बाद रहा था की अगले साल उसकी प्लास्टिक की फैक्ट्री में आग लग गई लेकिन फिर भी वो नहीं रुका.१९९६ में उसने पहले से काफी बड़ी प्लास्टिक की फैक्ट्री खोली ,अब उसका बिज़नेस सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं था पुरे भारत में फैलता जा रहा था. १९९८  में उसने गरीबो के लिए खोला जिसमे वो फ्री में इलाज़ करा सकते थे इसी साल उसने स्कूल भी खोले. संन २००० में उसने बिस्कुट बनाने की फैक्ट्री खोल, अब वो हज़ारो लोगो को पैसा कमाने का जरिया दे रहा था |


२००५ तक हरिया का बिज़नेस पुरे भारत में फ़ैल चूका था,उसके बाद भी हरिया रुका नहीं उसने काफी सारी और फैक्ट्री खोली,कंपनी खोली और बड़े लोगो के लिए वृद्धा आश्रम भी खोले. बिज़नेस में आगे बढ़ने के बाद उसको बहुत सारे अवार्ड्स से भी सम्मानित किया गया. २००७ में हरिया की माँ का देहांत हो गया, हरिया ने अपनी माँ के नाम पर एक कॉलेज भी खोला.संन २०१२ में दिल का दौरा पड़ने से हरिया की मौत हो गई,हरिया मरने से पहले हज़ारो-लाखो की ज़िन्दगी बदल गए लोग उसने द्वारा किये गए कार्यो को नहीं भूला सकते है  



हिम्मत रखो आगे बड़ो,
मुश्किल आये तो सामना करो |
 

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